Tuesday, July 26, 2016

लक्ष्मीपति मायावती दलित कैसे और नसीमुद्दीन सिद्दकी अन्ना क्यों है ?

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प्रवासनामा डेस्क -
पूर्व भाजपा नेता दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह / बेटी के मोर्चा खोलने के बाद जहाँ नसीमुद्दीन सिद्दकी कोमा में है वही बसपा सुप्रीमों मायावती ने कहा कि ' यदि सीएम अखिलेश यादव मुझे अपनी बुआ मानते है जैसा वे सार्वजनिक मीडिया वार्ता में गाहे - बगाहे कहते है, वें अपनी बुआ के सम्मान में दयाशंकर सिंह को गिरफ्तार करे ! ' गौरतलब है कि मायावती जी के साथ हुआ गेस्ट हाउस काण्ड अगर मै भूला नही तो मुलायम सिंह / सपा ब्रिगेड की ही देन रहा है अब अगर आरोपी और पीडिता दोनों सियासी भाई - बहन बन चुके है तो इस रक्षाबंधन का इससे बेहतर उपहार क्या होगा वोटर के लिए !
वैसे भी सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पिछले साढ़े चार साल में नसीमुद्दीन सिद्दकी सहित अन्य दस भ्रष्ट बसपा मंत्री को लोकायुक्त की जाँच के बाद बचाकर अपने भतीजे होने का पुख्ता प्रमाण ही दिया है ! लेकिन भाजपा ने भी कभी नसीमुद्दीन सिद्दकी पर अपने केंद्र सरकार की तोता जाँच एजेंसियों के जरिये ईडी / सीबीआई से सिकंजा कसने की कवायद नही की है ! तब जब इनके माध्यम से खुद को माँ गंगा सरीखा पवित्र बतलाया जाता हो ! माँ गंगा काशी से लेकर हरकीपौड़ी तक पतिथ है ये अलग बात है !
कहते है नेता नाम की वेश्या से सियासी आखाड़े में यह दंगल चुनाव होने तक ही उम्मीद रखी जाये वो ही उचित ! ..कहे से लंगोट में सबके बराबर बड़ा छेद है ! राजनीतिक दल आज तक दलित की व्याख्या न कर पाए जाति के आलावा और समाज ने दलित को उसकी जातीय मोहर का प्रतीक ही माना है !

                                                     

यह भी याद रखने काबिल बात है कि जिस दलित मसीहा / जिंदा देवी मायावती और उसके गुर्गो ने जो बीते दिवस लखनऊ के हजरत गंज में संविधान निर्माता बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की मूर्ति के सामने अपने ' माया अपमान ' का बदला दयाशंकर की बहु- बेटी / समग्र स्त्री जाति को गरिया कर लिया है !  इन्होने पिछले साढ़े चार साल एक बार भी समाजवादी सरकार के गुंडाराज / परिवारवाद और अपने ग्यारह भ्रष्ट मंत्री जो लोकायुक्त के जाँच में दोषी है, जिन पर मुक़दमे है भ्रष्ट कारनामों में बसपाई कभी एक मर्तबा भी ऐसे सामूहिक प्रदर्शन नही किये और न करेंगे ! पूछो समाजवादी मुख्यमंत्री से दबंग बसपा के दौलत वाले दलित नेता जेल में क्यों नही गए ? उत्तर प्रदेशमें पिछली सरकार में दलितों / किसानों के धन और कृषि जमीनों की सार्वजनिक लूट के बाद आप इन्हे दलित पैगम्बर मान सकते है प्रवासनामा नहीं !! 
अगर मायावती के चरित्र पर दयाशंकर सिंह ने ऊँगली उठाकर अपराध किया है तो मायावती के बहुजनवाद ने लखनऊ में स्त्री जाति को गाली देकर क्या किया है ? पाठकों और दलित चिन्तक अवश्य मुंह खोलना चाहिए !  अगर धर्म के प्रहरी हो बाकि सियासत में नेता एक पेशेवर वेश्या से बहुत आगे है क्योकि वो समाज बनाता है और ये खुद अपना चरित्र गिरा कर बनते है....गौरतलब है कि दयाशंकर सिंह की पत्नी ने अपनी बेटी और खुद को गाली / सार्वजानिक स्त्री अपमान के लिए मायावती और नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर केस दर्ज करवाने की बात कही है.‪#‎बेपर्दादलितवाद‬ ‪#‎ओछीराजनीती‬ 
‪#‎तूचोरमैसिपाही‬ - आशीष सागर

Sandhya Dwivedi जी की फेसबुक वाल से साभार - 


              बहन मायावती !!!
                           


मायावती क्या आपके नाम के आगे बहन लिखना ठीक होगा? क्या आप वाकई औरत हैं? नहीं नहीं आप आम औरत नहीं ! आपकी हिफाजत के लिए गुंडे हैं। ओह माफ कीजिए राजनीतिक गुंडे हैं। अगर आप पर कोई अश्लील टिप्पणी करेगा तो वह उसकी बेटी और पत्नी पर टूट पड़ेंगे। उसकी बहन पर अश्लील टिप्पणियां करेंगे। इसलिए आप हमारी तरह आम औरत नहीं। सशक्त और ताकतवर नेता हैं। मेरे घर का कोई पुरुष आप पर अश्लील टिप्पणी करेगा तो आपके गुंडे मुझ पर करेंगे। बारह साल की बच्ची को भी नहीं बख्सेंगे। आप दलित नेता हैं, किसी भी सवर्ण आम महिला से ज्यादा ताकतवर। आप ने सही कहा कि आपके कार्यकर्ता एहसास करा रहे थे दयाशंकर को कि किसी की बेटी और बहन पर अश्लील टिप्पणी करना कितना गलत है। सही हैं आप, अश्लील टिप्पणी के बदले अश्लील टिप्पणी। तो बलात्कार के बदले बलात्कार! सही न। तो फिर तो उत्तर प्रदेश में आपका राज आया तो किसी औरत पर अगर मर्द हिंसा करेगा तो उस मर्द के घर की औरतों पर हिंसा होगी। बलात्कार के बदले बलात्कार होगा। यानी औरतों पर हिंसा के बदले औरतों पर ही हिंसा होगी। और आप उसे तर्क संगत ठहराएंगी। वाह बहन! आप का जवाब नहीं। मैंने बहुत पहले कहीं पढ़ा था, सत्ता हमेशा भ्रष्ट करती है। सत्ता का स्वाभाव मर्दवादी होता है। बहन मायावती आपकी टिप्पणी से यह बात फिर याद आ गई। मायावती आप क्या वाकई समझती हैं कि आप औरत हैं? आपकी इस टिप्पणी ने आपके औरत होने पर सवाल खडे कर दिए हैं। मुझे लगता ही नहीं यकीन है कि आपने अपने ऊपर हुई टिप्पणी से खुद को अपमानित कम और सियासी मौका मिलने की खुशी में तकदीरवाला ज्यादा समझा होगा। चुनाव के पहले आप पर की गई टिप्पणी आपकी पार्टी के लिए संजीवनी का काम कर सकती है। माफ कीजिए मायावती हम आपको औरत मानने से इनकार करते हैं। और हां यह सारे सेकुलर कहां गए? मायावती पर टिप्पणी होने पर विलाप करने वालों के लिए क्या सवर्ण औरतें, औऱतें नहीं होतीं। महिलावाद की रट लगाए लोगों के लिए अल्पसंख्यक, दलित वर्ग की औरतों के लिए विलाप करने का ही फंड मिलता है क्या? ओह सच है, एजेंडे में सवर्ण औरतें नहीं। भई यह तो स्पांसर्ड महिलावाद है।

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