Friday, August 05, 2016

क्या अवैध पत्थर खदानों पर भी नजर घुमायेगी सी0बी0आई ?

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- कागजो में बन्द पहाड़ पर ब्लास्टिंग का गुबार है
-पताल की गहराई नांप रहे बेखौफ पट्टा धारक
- समाजवाद का संरक्षण और पत्थरों की लूट जारी है 

किस्त एक -
महोबा - बुंदेलखंड की नदियों में बालू की अवैध खनन में राज्य सरकार की बात पर अविश्वास जताकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय नें सी0बी0आई0 को जाँच के आदेश दिए हैं ! जिसका असर बालू घाटों में तो दिखाई दे रहा है। माफिया अवैध खनन के सबूत हटाने में जुटे हुये है । खनिज अधिकारी उन्हें इसकी तरकीब बतलाने में ! बालू खदान मालिकों ने कही भी एमएम 1 प्रपत्र ( माइनिंग प्लान फार्म ) नहीं भरा है और बिना खनन योजना दर्शाए एक दिन में ही सैकड़ों टन बालू निकासी खदान से की गई है ! इसका खुलासा कैग ने अपनी आडिट रिपोर्ट 2015 में किया है,यह रिपोर्ट जिले के खनिज अधिकारी दबाये बैठे है. उल्लेखनीय है कि कल तक गुलजार रहनें वाले बालू घाटों से मशीने गायब है और सन्नाटा पसरा हुआ है। लेकिन महोबा के पहाड़ो में अभी भी बिना परमीशन भारी अर्थ मूविंग मशीनों से मानकों को धता बताकर खनन तो हो ही रहा है,बल्कि उन पहाड़ों की खदानों में भी अधाधुंध खनन जारी है जिनकी वैधता तक समाप्त हो चुकी है। स्थानीय स्तर के सत्ता संरक्षित नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को न तो नियम कानूनों का भय है और न ही सी0बी0आई0 जाँच से कोई असर पड़ रहा है।
गौरतलब बात है कि महोबा जिले में कबरई और उसके आस-पास के इलाकों में नियमों के विपरीत बिना खनन योजना लागू किये पत्थर खदानों में खनन कार्य किए जानें के विरुद्ध 2 वर्ष पूर्व कबरई के सामाजिक कार्यकर्ता मंगल सिंह की शिकायत पर कार्यवाही की थी.तत्कालीन महोबा सदर तहसीलदार गुलाब सिंह राजपूत नें कबरई के पचपहरा और डहर्रा में जाँच करकें जिलाधिकारी को दी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा था कि इन इलाकों में पट्टा धारकों द्वारा खनन क्षेत्रों में बिना सीमा चिन्ह व पहचान प्रदर्शन बोर्ड लगाये बगैर 100 से 150 तथा कहीं-कहीं 200 से 250 फुट के खडे़ फेसों में बिना किसी सुरक्षा मानकों को अपनाये बगैर खनन किया जा रहा है तथा बिना परमीशन के बड़ी-बड़ी अर्थमूविंग मशीनों से पत्थर निकाला ता रहा है। किन्तु तहसीलदार की इस रिपोर्ट को खजिन अधिकारी बी0पी0 यादव नें सतही रिपोर्ट बताकर ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
                                                   

महोबा में चल रहे खनन मामलों में यह पहली रिपोर्ट नहीं थी। इसके पहले भी कई बार जाँच टीमों नें इस प्रकार की रिपोर्ट शासन को भेजीं है लेकिन अभी तक खनन क्षेत्रों में काम करनें के लिए अर्थ मूविंग मशीनों, (पोकलैण्ड आदि) के परमीशन नहीं लिये गये हैं और नही पत्थर खदानों में पट्टा धारकों के क्षेत्रफल निर्धारित करनें के लिए सीमा चिन्ह बनाये गये हैं। और तो और यहाँ पर अधिकतर खदानो में पहचान प्रदर्शन बोर्ड भी नहीं लगाये गये हैं ! जिससे पट्टा के खनन क्षेत्र व उसकी वैधता और उसके धारक का पता चल सके। इसी का फायदा उठाक महोबा मुख्यालय से 10कि0मी0 की दूरी पर प्रशासनिक अधिकारियों से सांठ-गाँठ कर उन पहाड़ों मे भी खनन करवा रहें है जिनकी वैधता समाप्त हो चुकी है।
                                                         
खनन माफियाओं व जिले की अधिकारियों की इस अन्धेरगर्दी का स्थानीय स्तर पर तो कोई आवास उठानें की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बालू खदानों की जाँच में निकला सी0बी0आई0 टीम का जक्खा इस ओर भी देखेगा या फिर खनन माफियाओं की कमाई के आंगे सी0बी0आई0 की स्वतंत्रता भी धराशाही हो जायेगी।
डहर्रा के इन पहाड़ों में कागजो में बन्द है खनन मगर खदान चालू है -
पट्टा धारक व पता- पहाड़ का नाम- गाटा सं0- रकवा (प्रति एकड़ में)- वैधता
नितिन कुमार ओमर पुत्र नाराण प्रसाद निवासी मैन मार्केट मौदहा डहर्रा 339 2.00 23.11.2005   से        22.11.2015 तक
विनय कुमार राय पुत्र श्री राजनाथ राय निवासी गांधीनगर जनपद- महोबा डहर्रा 953 3.00 28.05.2005 से 27.05.2015 तक
प्रवीण कुमार पुत्र श्री नरेन्द्र कुमार निवासी विवेक नगर कबरई हमीरपुर डहर्रा 339 3.00 10.02.2005 से 09.02.2015 तक
श्रीमती रानी पत्नी सुरेन्द्र निवासी- गांधी नगर महोबा डहर्रा 339 2.50 23.03.2004 से 22.03.2014 तक
अनिल कुमार अग्रवाल पुत्र श्री यतीशचन्द्र निवासी- छोटी बाजार बांदा डहर्रा 339 4.00 21.05.2005 से 20.05.2015 तक
चन्द्रशेखर अग्रवाल पुत्र श्री ओमप्रकाश अग्रवाल निवासी- खजांची टोला हमीरपुर डहर्रा 339 5.00 19.10.2004 से 18.10.2014 तक
मुल्लू साहू पुत्र श्री रामेश्वर निवासी- सुमेरपुर जनपद- हमीरपुर डहर्रा 339 4.00 05.05.2005 से 04.05.2015 तक
श्रीमती पूनम भरद्धाज पत्नी सोमेश भरद्धाज निवासी अमर टाकीज बांदा डहर्रा 339 3.00 25.07.2005 से 24.07.2015 तक
महोबा में पत्थर खनन / ढुलाई की ये सूरत बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश वाले हिस्से तक फैली है.सरकार परस्त पट्टा धारक को न मानक से मतलब है और न कनीज अधिकारी की मौजूदगी से ! उनका हिस्सा उन्हें समय से मिलता रहे ये इस काले खेल की हरी झंडी के लिए काफी होता है ! हाल ही में गौरहारी की खदान में दबकर मरे मजदूर  की ख़बरें लोग भूले नहीं होंगे लेकिन सिस्टम है भाई यहाँ रोकेगा कौन सीबीआई !!! उफ़ ये तो सरकारी तोता है न ! 
पंकज सिंह परिहार / आशीष सागर 


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