Friday, June 17, 2016

बुंदेलखंड के सुखाड़ में तालाबों का सुकाल मगर भरेंगे कैसे ?

पुराने और चंदेलकालीन तालाबों के अवैध कब्जे हटाये बगैर करोड़ों रूपये इस बरस भी बुंदेलखंड के तालाबों पर खर्च हो रहे है.जब तक इनका कैचमेंट एरिया और प्राकृतिक जल स्रोत के आवागमन का रस्ता साफ नही होता क्या ये तालाब भर पाएंगे ? उधर खेत तालाब योजना पर भी पूर्व बसपा सरकार की तर्ज से किसानों को खेत में सोख्ता गड्ढे देने का काम बखूबी किया जा रहा है.बुंदेलखंड का सूखा और मानसून दोनों की आवक सरकारी मिशनरी के लिए अच्छे दिन ही है !


राज्य सभा टीवी संवाददाता एवं स्वतंत्र लेखक अरविन्द कुमार सिंह अपने भ्रमण रिपोर्टिंग के संस्मरण याद करते हुए बतलाते है कि कभी लबालब भरा रहने वाला ऐतिहासिक पन्नासर तालाब से बहुत से प्रसंग जुड़े हैं। स्वामी विवेकानंद जी जब अमेरिका से भारत लौटे थे तो यहां उनका भव्य स्वागत हुआ और यहीं से उन्होंने यहां के नागरिकों को संबोधित भी किया था। लेकिन आज यह तालाब बेपानी है। क्रिकेट का मैदान बना है। बच्चे खेल रहे हैं। यह कही न कही हमारी विरासत और देश में बड़े जोहड़ ,तालाबों ,कुओं के अस्तित्व पर यक्ष प्रश्न है ? ये प्राचीन तालाब ही बारिश के पानी को संचय करने के  बाद राजस्थान के जैसलमेर,बाड़मेर और जयपुर समेत देश के अलग - अलग हिस्सों में रचे - बसे और हुनर से गढ़े गए नीर के स्रोत रहे है ! मगर आज विकास के अनियोजित माडल ने इनका जो हाल किया है उसको शब्दों में लिखना भी दुखद है ! 
 उधर बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खेत तालाब योजना पर 196.21 लाख और बड़े तालाब की गाद,सिल्ट हटाने पर 82.92 करोड़ खर्च करने की हरी झंडी दिए  है ! मालूम रहे कि बिना तालाबों पर अतिक्रमण हटाये और प्राकृतिक दबे स्रोत खोले बगैर ये काम किया जा रहा है ! मुख्य सचिव अलोक रंजन को खेत तालाब योजना की सलाह देने वाले स्थानीय समाजसेवी इस खेल पर चुप है कि अवैध कब्जे हटाये बिना बड़े तालाब क्यों खुद रहे है ? मिट्टी निकालने के नाम पर इसका उत्तर नही मिल रहा ? इन बड़े तालाबों के कैचमेंट एरिया के ढाल में होने के कारण पानी आता था !पहाड़,बस्ती,नालों,बंधी से भरते थे ये महोबा और बाँदा,टीकमगढ़,छतरपुर के तालाब ! ऐसे करीब चार हजार से अधिक स्रोत आज अवैध कब्जों में कैद है ! अगर मानसून ने धोखा दिया तो यह भरेंगे कैसे ? अतिक्रमण को नेस्तानबूत किये बिना ? उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सात सदस्य वाली समिति उच्चतम न्यायलय एवं उच्च न्यायलय के आदेश उपरांत गठित है जिसमे अपर जिला अधिकारी वित्त / राजस्व,पुलिस अधीक्षक,समस्त उप जिलाधिकारी,जिला सूचना अधिअकरी सदस्य नामित है.इनका कार्य तालाब / पोखर / चारागाह / कब्रिस्तान के अतिक्रमण को मुक्त करवाना है ! 
                                                                              




प्राप्त शिकायतों का समयव्ब्द्ध निस्तारण भी इन्हे ही करवाने की हिदायत प्रदेश के राजस्व आयुक्त किशन सिंह अटोरिया ने दी है ! प्रवासनामा के पास प्रदेश के सभी जिलों के तालाब के दस्तावेज है और उस आदेश की कोर्ट / प्रसाशनिक प्रति भी ! आगामी एक जुलाई 2016 से बुंदेलखंड के बाँदा से लखनऊ तक सात दिवसीय साइकिल यात्रा ' तालाब एवं भूदान चारागाह मुक्ति अभियान ' के संयोजन में निकाली जा रही है.ये अभियान प्रख्यात पर्यावरण विद अनुपम मिश्रा की पुस्तक ' आज भी खरे है तालाब ' को समर्पित है.अभियान संरक्षक / संपादक दुधवा लाइव.कॉम के केके मिश्रा ने बतलाया कि यात्रा में करीब  तीन सैकड़ा ग्राम से गुजरते हुए पथिक, सामाजिक संघठन के लोग और आन्दोलनकारी इलाहाबाद विश्व विद्यालय के छात्र - छात्रा जगह - जगह आदेशों की प्रति वितरित करेंगे,नुक्कड़ नाटक और गीत से जागरूकता लाने का प्रयास किया जायेगा !
                                                                    


इसके लिए युवा छात्र इलाहाबाद में ' पोस्टर कैम्पेन '  भी कर रहे है.आठ जुलाई को समापन में प्रेस क्लब लखनऊ में एक विमर्श के दौरान जल प्रबंध एक्सपर्ट इस पर व्याख्यान देंगे जिसमे अरविन्द कुमार सिंह,सुधीर जैन तालाब एक्सपर्ट,पियूष बबेले  इंडिया टुडे विशेष संवाददाता,कुलदीप कुमार जैन जल प्रबंधक,प्रो. वी.के. जोशी भूगर्भ विज्ञानी सहित विजय पाल बघेल (ग्रीन मैन ) साइकिल यात्रा लीडर रामबाबू तिवारी,नलनी मिश्रा,प्रणव,डाक्टर मेराज अहमद सिद्दकी,प्रोफ़ेसर योगेन्द्र यादव (घाना अतिथि प्रवक्ता ),सुनील दत्ता ( नेशनल लोक रंग एकडेमी,आजमगढ़),राघवेन्द्र मिश्रा,अन्नदाता की आखत से शैलेन्द्र मोहन श्रीवास्तव,वीरेंद्र गोयल मौजूद रहेंगे ! - आशीष सागर ,प्रवास बाँदा 

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