Friday, June 03, 2016

बुंदेलखंड का लातूर महोबा का खन्ना

 
' महोबा का खन्ना बुंदेलखंड का रेगिस्तान ' 
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- इस गाँव में जाना तो पानी साथ लेकर जाना इतना कि अगर पेट ख़राब हो जाए तो शौच कर सको !!! - बहुएं यहाँ पिता को बद्दुआ देती है हमें मार देते ब्याह क्यों कर दिया ! - रोजाना चार किलोमीटर का एक चक्कर और पानी दो गगरी !- हर साल पानी की जंग से लड़ने वाला खन्ना अबकी खून के आंसू रोता है !

यह बुंदेलखंड के महोबा का खन्ना क्षेत्र है ! हर साल की तरह यहाँ पानी की कहानी दर्दनाक है मगर पिछली साल यह सूरत न थी ! अब तो ब्याही बहुएं अपने पिता को कोसती है मार देते ब्याह क्यों कर दिया इस गाँव में ! वही गाँव की सयानी बेटियां सदमे में है आगे की जिंदगी कैसे कटेगी ! जब हम रात 8 बजे इस गाँव पहुंचे तो गाँव के बाहर ढाई किलोमीटर स्थित बरसाती चन्द्रावल नदी के हरे काई से पटे नाले की तरफ जाती हुई महिला,लड़कियां,पुरुष दिखलाई दिए !
जब मै उनके साथ उसी तरफ खेतों से होकर नाले तक पहुंचा तो छोटे से चोहड़ में मुर्गा की अवस्था में झुके लोगो को देखकर दुखी था ! पूछने की आवश्यकता नही थी कि यह क्या कर रहे हो ! पानी के लिए उनके ऐसे संघर्ष को आँखों में उतरते हुए यह तो जान गया था कि इस गाँव में पानी मांगना किसी के कत्ल करने के बराबर है ! अगर धोखे से आपका पेट दगा दे जाए तो आपको खून के आंसू रोना पड़ेगा यह तय है ! यह पानी रिसता हुआ नाले से खोदे गए गड्ढे तक आता है जो गांववाले रात -दिन भरते नजर आएंगे ! ऐसी ही विकराल समस्या गुसियारी,कपसा,गुढ़ा,सायर की है ! गौरतलब है ये वो गाँव है जिनकी मिटटी में नमक है ! सायर में 15 तालाब है सब सूखे है,गुसियारी का बड़ा तालाब चटियल रंग लिए है !
' भौरां तेरा पानी गजब कर जाए , गगरी न फूटे चाहे खसम मर जाए !
 
                                                 



यह खन्ना पर समसामयिक कहावत लगती है ! चोहड़ से पानी लाते इसी गाँव के संतबिलास,छुट्टन,अमरजीत,प्यारे ने बतलाया कि ग्राम प्रधान और तहसील दिवस में अर्जी देकर,कहकर हलख सूख गई है कुछ नही होता ! प्रधान और जो पैसे वाले है वे खरीदकर पानी पी रहे है या जिनके अपने बोर है मगर जो गरीब है उसकी मौत है ! ग्रामीण उमादेवी,कौशल्या,जमनी देवी ऊषा ने कहा की दुआ करना हमारा जन्म न हो फिर कभी ! गाँव के नंदकिशोर उबासी में रोता हुआ अपनी पत्नी को तस्वीर खिचानें की स्वीकृति देता है जबकि उमा को मर्यादा का ख्याल है कि मुझे कौन - कौन देखेगा इसलिए पति ने जब तक हाँ नही की घुंघट नही हटा !....जान चली जाए पानी से लेकिन दुख भरा मेरा चेहरा पति के आगे कोई न देखे यह सहनशीलता स्त्री में ही हो सकती है जबकि यह यातना अपराध है बगावत के लिए ! देश के प्रधानमंत्री और समाजवादी मुख्यमंत्री जी यह पानी एक बार अवश्य पियो अगर वास्तव में देशभक्त हो ! शर्म आये तो सोचना यह कैसा विकास है ?
गांववाले कहते है भैया सब आते है फोटू खीचती है मगर पानी नही मिलता गर्मी में ! खन्ना में जमीन का पानी खारा है जो न खेती के काबिल है ,न जानवर पीते है , न ही मनुष्य ! सब कुछ उसी बरसाती चंद्रावल नदी के नाले पर निर्भर है जिसमे महोबा में बीते एक साल से जलपुरुष / प्रवचन बाबा राजेन्द्र सिंह राणा,संजय सिंह के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री,मुख्य सचिव अलोक रंजन को लहाकर नदी के मनारेगा से पुनर्जागरण कर डंका पीटे है ! महोबा से लेकर झाँसी तक बैठक हुई नतीजा सामने है ! महोबा के खन्ना की जिंदगी नीर के लिए सिसक रही है ! जिस नाले में आप शायद शौच न करे उसका पानी महिला,पुरुष पीने को बेबस है !

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