Friday, August 19, 2016

' बंजारपुर से निकली कान्हा की बंजर नदी '

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19 अगस्त - ‪#‎बंजरनदी‬ 
 बंजारपुर से निकली बंजर नदी नर्मदा की सहायक है !
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' कैसे हो गई मै बंजर ये जान लो सागर,कि अपने दूध से मैंने ये कान्हा उपवन सींचा है ' !!

विकास संवाद के दसवें मीडिया संवाद से लौटकर आज दिन तक मै इस बंजर नदी के उद्गम स्थल / गर्भ गृह को लेकर उहापोह में था ! पिछली पोस्ट में लिखा ' क्या नदी भी बंजर होती है ' ? तब तक इसके उद्गम स्रोत से वाकिफ नही था ! गूगल को खंगाला और कुछ नदियों के बारे में पढ़ा खाशकर नर्मदा की दौड़ पर तब ' बंजर नदी ' की खलबली शांत हो सकी ! कान्हा के बैगा समुदाय सहित आस-पास के बालाघाट के बाशिंदों की प्यास बुझाने वाली ये नदी असल में बंजर नही बंजारों की नदी है                               

उल्लेखनीय है कि ' बंजर नदी' का उद्गम स्थल बंजारपुर ( राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़) है ...! 
सुविख्यात लेखक / चित्रकार एवं पर्यावरणवादी अमृतलाल बेगड़ जिनका जन्म 1928 को जबलपुर में हुआ ! उन्होंने 1948 से 1953 तक शांति निकेतन में कला का अध्ययन किया ! फिर 1988 तक जबलपुर में चित्रकला के अध्यापक रहे ! इन्होने ऋषि मार्कंडेय द्वारा की गई नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा में पूर्ण की ! यह परिक्रमा नर्मदा और बंजर नदी के संगम स्थल महराजपुर ( मंडला ) से प्रारंभ की.जंगल,गाँव और कान्हा रिजर्व के हरित वनों से होते हुए उनके साथी ' बंजर नदी ' के उद्गम स्थल बंजारपुर ( राजनांदगाँव,छतीसगढ़ ) पहुंचकर वापस दूसरे छोर इसके संगम स्थान महराजपुर तक आये थे ! इस यात्रा में उन्हें अपनी पत्नी कान्ता बेगड़ ( 73 वर्ष ) का पूरा सानिध्य - साथ मिला ! उनके कांरवा में शामिल लोग पैदल होने के चलते बीच में छूटते रहे लेकिन पति - पत्नी का संकल्प बना रहा ! भीषण गर्मी में इन्होने 375 किलोमीटर की लम्बी यात्रा 19 दिवस में पूरी की ! संभवत अमृतलाल बेगड़ पहले ऐसे व्यक्ति रहे जिन्होने मार्कंडेय ऋषि के बाद ' बंजर नदी ' की पदयात्रा पूरी की ! 
तस्वीर - कान्हा नेशनल टाइगर,मंडला,मध्यप्रदेश !
( स्रोत - लोकमत समाचार,नागपुर साभार @ यात्रा के दौरान प्रकाशित ) प्रस्तुत - आशीष सागर

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