Thursday, September 17, 2015

बुंदेलखंड विशेष पैकेज से बना रसिन बांध भी किसान को निराश कर गया !



17.09.2015 Banda - पूर्व केंद्र की कांग्रेस -मनमोहन सरकार ने बुंदेलखंड को सूखे और जल संकट से बचाने के लिए बुन्देलखंड पॅकेज की नीव रखी थी ! सात जनपद उत्तर प्रदेश के और 6 जिले मध्यप्रदेश के इस भारीभरकम धनराशी से सजाये गए,किसान को पानी और खुशहाली के सपने दिखलाये लेकिन सिस्टम में दुर्गन्ध देती व्यवस्था ने इस बुन्देलखंड पॅकेज को भी नही बख्सा.




ये उजाले के हिजाब में बनाया गया विशाल बांध भी किसानो को बेपानी कर गया ...एक रिपोर्ट रसिन बांध पर जारी !

चित्रकूट, बुंदेलखंड पैकेज के 7266 करोड़ रुपए के बंदरबांट की पोल यूं तो यहां बने चेकडेम और कुंए ही उजागर कर देते हैं, लेकिन पैकेज के इन रुपयों से किसानों की जमीन अधिग्रहण कर बनाए गए बांध से किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने का दावा तक साकार नहीं हो सका. चित्रकूट जनपद के रसिन ग्राम पंचायत से लगे हुए करीब एक दर्जन मजरों के हजारों किसानों की कृषि जमीन औने-पौने दामों में सरकारी दम से छीनकर उनको सिंचाई के लिए पानी देने के सब्जबाग दिखाकर पैकेज के रुपयों से खेल किया गया.रसिन का किसान ब्रजमोहन यादव जिसको आज तक मुआवजा नही मिला है उसने आत्महत्या कर ली थी इसमे छलांग लगाके.इसको बनाने में एक बड़े हिस्से के जंगल को काट दिया गया जिससे किसान और आदिवासी ईधन का जुगाड़ करते थे.
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के मातहत बने चौधरी चरण सिंह रसिन बांध परियोजना की कुल लागत 7635.80 लाख रुपए है, जिसमें बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत 22.80 लाख रुपए पैकेज का हिस्सा है, शेष अन्य धनराशि अन्य बांध परियोजनाओं के मद से खर्च की गई है. बांध की कुल लंबाई 260 किमी है और बांध की जलधारण क्षमता 16.23 मि. घनमीटर है. वहीं बांध की ऊंचाई 16.335 मीटर और अधिकतम जलस्तर आरएल 142.5 मीटर, अधिकतम टॉपस्तर आरएल 144 मीटर बनाई गई है. इस बांध से जुड़े नहरों की कुल लंबाई 22.80 किमी आंकी गई है.....!
गौरतलब है कि बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत 22.80 लाख रुपए ( करीब 23 करोड़ रूपये ) इस बांध में गर्क होने के 4 साल बाद अब जब आप इस बांध को देखेंगे तो बुंदेलखंड पॅकेज का रुपया सात जनपद में कैसे बन्दर बाट किया गया है बसपा सरकार में इसकी तस्दीक हो जाएगी.इस बांध स्थल के किनारे बना ईको पार्क और गौतम बुद्ध की प्रतिमा जो करीब 5 करोड़ के आस पास रही होगी अब आंधी में उड़ चुकी है !...पार्क में लगाये हिरन,जिराफ,आर्टिफिशियल झरने,पीओपी से बने लाइट लैम्प ( जिनमे बालू भरकर काम चलाया गया था)अब धड़ाम हो गए है...इस बीहड़ में इस पार्क का औचित्य पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ही बतला सकती है क्योकि उन्हें और उस समय उनके चाटुकार अफसरों को गौतम बुद्ध से अधिक इश्क रहा है ! बांध स्थल पर बना कंट्रोल रूम अब स्थानीय रहजनों के ऐयाशी/ गर्म गोश्त खाने का अड्डा है ! उसके कमरे के अन्दर कांच से सजी खिड़की उखड़ गई है और फर्श के टाइल्स तो अन्ना जानवरों के गोबर से सजकर हंसी कर रहे है वो भी टूटे हुए ! न किसानो को पानी मिला और न खेत को हरियाली इस वर्ष 2015 सितम्बर माह में ये 19 सूखा पड़ने जा रहा है किसान अपनी तिली और मसूर की फसल खो चुका है अगर यही हाल रहा तो पानी से महरूम यहाँ का खेत चैत की खेती भी नष्ट कर लेगा...अगर रसिन बांध से फतेहगंज क्षेत्र के किसानो को पानी मिलता तो ये तस्वीर बदल सकती थी !....इस बांध के बारे में विस्तार से पुरानी खबरे पढने के लिए यहाँ  दिए लिंक में क्लिक करे ....
http://hindi.indiawaterportal.org/node/46279 
http://ashishsagardixit.blogspot.in/2013/11/blog-post.html @ आशीष सागर


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