Sunday, August 26, 2012

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सिद्दीकी के खिलाफ सीबीआई की सिफारिश

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बसपा सरकार में लगभग डेढ़ दर्जन विभागों के मंत्री रहे नसीमुद्दीन के खिलाफ मंत्री होते हुए आय से अधिक संपत्ति और पद का दुरूपयोग करने की शिकायत में लोकायुक्त एन.के. मेहरोत्रा ने पूर्व मंत्री को दोषी पाया था. सिद्दीकी की एमएलसी पत्नी हुस्ना सिद्दीकी और व्यवसायी बेटे को भी नोटिस भेजा था...
जनज्वार. देश के लोकायुक्त जस्टिस एन.के. मेहरोत्रा ने पूर्ववर्ती बसपा सरकार के सबसे पावरफुल मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के एक और मामले में प्रदेश सरकार से सीबीआई जांच की सिफारिश की. लोकायुक्त ने बताया कि बांदा निवासी आशीष सागर दीक्षित की शिकायत पर जांच के बाद सिद्दीकी और उनके पुत्र अफजल सिद्दीकी के नाम बांदा जिले में आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक सम्पत्ति हासिल करने के प्रमाण मिले हैं. 
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दीक्षित की शिकायत की जांच में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पुत्र अफजल के नाम से छह और कम्पनियां संचालित होने का खुलासा हुआ है. यह बताते हुए कि अफजल बाराबंकी एवं लखनऊ में बेनामी सम्पत्ति हासिल करने तथा आज संदर्भित प्रकरण समेत दोनों मामलों में आरोपी हैं, लोकायुक्त ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले की भी सीबीआई अथवा प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराने की सिफारिश की है. 
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के सबसे करीबी और कद्दावर कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन का नाम भ्रष्टाचार के दर्जनों मामलों में प्रकाश में आ चुका हैं. बसपा सरकार में लगभग डेढ़ दर्जन विभागों के मंत्री रहे नसीमुद्दीन के खिलाफ मंत्री होते हुए आय से अधिक संपत्ति और पद का दुरूपयोग करने की शिकायत में लोकायुक्त एन.के. मेहरोत्रा ने पूर्व मंत्री को दोषी पाया था. इस मामले में लोकायुक्त ने सिद्दीकी की एमएलसी पत्नी हुस्ना सिद्दीकी और व्यवसायी बेटे को भी नोटिस भेजा था. 
लखनऊ के पत्रकार जगदीश नारायण शुक्ला की शिकायत पर जांच के बाद लोकायुक्त ने सिद्दीकी आय से अधिक संपत्ति के आरोप सही पाए थे. जस्टिस मेहरोत्रा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती से उनके खिलाफ सीबीआई जांच के सिफारिश 22 फरवरी, 2012 को करने की मांग की थी, लेकिन मुस्लिम वोटों और अपने खास मंत्री को बचाने की जुगत में मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त की सिफारिश को यह कहकर ठुकरा दिया था कि  लोकायुक्त को इस तरह की सिफारिश का अधिकार नहीं है. 
प्रदेश में नयी सरकार के गठन के दो ही दिन बाद लोकायुक्त ने पुन: 17 मार्च को प्रदेश सरकार को नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की थी लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया. यह तीसरी बार है कि जब नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ सीबीाआई जांच की सिफारिश की गई है.   
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने कार्यकाल में शराब व्यवसाई पोंटी चड्ढा को कई सौ करोड़ रुपये का फायदा करवाया था. चाहे यूपी की 22 चीनी मीलों की नीलामी हो या यूपी में शराब की सप्लाई से लेकर फुटकर बिक्री का मामला उन्होंने सभी मामलों में चड्ढा के हितों को खास तवज्जो दी. 
यह मामला चड्ढा के घर हुई आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान भी सामने आया था. जिसे बाद में आयकर की विभागीय कार्रवाई के रूप में भर दिखाकर दबा दिया गया. देखना होगा कि अखिलेश सरकार में लोकायुक्त की सिफारिश को अमल में लाया जाएगा या फिर तत्कालीन शासन की तरह यह कहकर ठुकरा दिया जायेगा कि सीबीआई जांच की सिफारिश  लोकायुक्त के दायरे से बाहर है?

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